सिलीगुड़ी सम्मेलन में कृषि आदान व्यापारियों की एकजुटता पर जोर, 25 हजार व्यापारियों को जोड़ने का लक्ष्य

Siliguri conference emphasizes unity among agricultural input traders aims to connect 25000 traders

सख्त कानूनों और व्यापारिक चुनौतियों के बीच संगठन को मजबूत बनाने का आह्वान; पश्चिम बंगाल में जल्द शुरू होगा चरणबद्ध सदस्यता अभियान

हलधर किसान, सिलीगुड़ी।
पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में कृषि आदान (एग्रो इनपुट) व्यापारियों का महत्वपूर्ण सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें उत्तर बंगाल के विभिन्न जिलों से पहुंचे व्यापारियों और पदाधिकारियों ने संगठन को मजबूत करने तथा व्यापार से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए एकजुटता पर जोर दिया। कार्यक्रम में सख्त कानूनों, खाद-बीज व्यापार में बढ़ती चुनौतियों और छोटे व्यापारियों के भविष्य को लेकर गंभीर चर्चा हुई।

फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ सिलीगुड़ी के सहयोग से आयोजित ‘पश्चिम बंगाल कृषि उपकरण व्यवसाई कल्याण समिति’ की इस जनरल मीटिंग में उत्तर बंगाल के लगभग 10 जिलों के 60 से अधिक प्रमुख व्यापारियों और पदाधिकारियों ने भाग लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ व्यवसायी श्री सुनील कुमार कुंडू ने की। सम्मेलन में कृषि आदान व्यापार से जुड़े वर्तमान हालात और भविष्य की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।

सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए ऑल इंडिया एग्रो इनपुट डीलर एसोसिएशन के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं मध्य प्रदेश संगठन के प्रदेश सचिव श्री संजय रघुवंशी ने व्यापारियों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में सरकार द्वारा व्यापार से जुड़े कई सख्त नियम लागू किए जा रहे हैं। ऐसे में यदि व्यापारी संगठित नहीं हुए, तो आने वाले समय में छोटे व्यापारियों के सामने व्यापार बंद होने जैसी गंभीर परिस्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं।

उन्होंने कहा कि संगठित शक्ति ही व्यापारियों के अधिकारों की रक्षा कर सकती है और समस्याओं का समाधान निकाल सकती है। अपने संबोधन में उन्होंने मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए बताया कि संगठन की लगातार मांग और प्रयासों के बाद राज्य सरकारों ने सब्सिडी वाले यूरिया एवं डीएपी उर्वरकों के साथ कंपनियों द्वारा की जा रही जबरन टैगिंग पर प्रतिबंध लगाया है। यह सफलता संगठित संघर्ष का परिणाम है।

उन्होंने पश्चिम बंगाल के व्यापारियों से भी अपील की कि यदि वे एकजुट होकर संगठन को मजबूत करेंगे, तो यहां भी व्यापारियों की समस्याओं का समाधान संभव है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए व्यापारियों के हित में सकारात्मक कदम उठाए जा सकते हैं।

करीब एक घंटे के अपने विस्तृत उद्बोधन में श्री रघुवंशी ने खाद, बीज और कीटनाशक के नमूने (सैंपल) फेल होने की स्थिति में व्यापारियों के लिए उपलब्ध कानूनी विकल्पों और बचाव के उपायों की जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में यदि संगठन ‘सीड एक्ट’ या ‘पेस्टिसाइड मैनेजमेंट बिल’ जैसे मुद्दों पर न्यायालय का रुख करता है, तो उसका लाभ उन्हीं व्यापारियों को मिलेगा जो संगठन के सक्रिय सदस्य होंगे।

उन्होंने सदस्यता अभियान को मजबूत बनाने पर विशेष जोर देते हुए सभी व्यापारियों से अधिक से अधिक संख्या में संगठन से जुड़ने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल के प्रदेश अध्यक्ष श्री चित्ररंजन डे ने बताया कि राज्य में लगभग 25 हजार कृषि आदान व्यापारिक प्रतिष्ठान संचालित हैं और संगठन का लक्ष्य इन सभी प्रतिष्ठानों को सदस्यता से जोड़ना है। इसके लिए पूरे पश्चिम बंगाल में जल्द ही चरणबद्ध तरीके से व्यापक सदस्यता अभियान शुरू किया जाएगा। इस अभियान को सफल बनाने के लिए विभिन्न जिलों के पदाधिकारियों ने अपनी प्रतिबद्धता भी जताई।

सम्मेलन में कृषि विभाग के सेवानिवृत्त अधिकारी एवं संगठन के नवनियुक्त सलाहकार श्री नरेंद्र कुमार दास, जोनल प्रेसिडेंट श्री माणिक डे, श्री राजा चौधरी तथा श्री सुरेंद्र राठी ने भी व्यापारियों को संबोधित किया और संगठन की मजबूती पर जोर दिया।

कार्यक्रम का संचालन कूच बिहार के श्री जगत बंधु साहा ने किया, जबकि सचिव श्री तपन जी ने सभी अतिथियों, पदाधिकारियों एवं व्यापारियों का आभार व्यक्त किया।

सिलीगुड़ी में आयोजित इस प्रथम बड़े सम्मेलन की सफलता पर मध्य प्रदेश कृषि आदान विक्रेता संघ के अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री मान सिंह राजपूत, प्रदेश उपाध्यक्ष श्री कृष्णा दुबे, जॉइंट सेक्रेटरी श्री राजेश मलैया तथा सदस्यता अभियान प्रभारी श्री विनोद जैन सहित अन्य पदाधिकारियों ने शुभकामनाएं दीं।

सम्मेलन के सफल आयोजन को संगठन विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। व्यापारियों का मानना है कि यदि सदस्यता अभियान सफल रहा, तो पश्चिम बंगाल में कृषि आदान व्यापारियों की आवाज और अधिक प्रभावी रूप से सरकार एवं प्रशासन तक पहुंच सकेगी। इससे भविष्य में व्यापारियों के हितों की रक्षा और व्यापार से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए सामूहिक प्रयासों को मजबूती मिलेगी।

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