मत्स्य निर्यात बढ़ाने पर केंद्र सरकार की बड़ी पहल, अंतर्देशीय राज्यों की क्षमता बढ़ाने पर जोर

The central government has taken a major initiative to increase fish

मत्स्य पालन और वाणिज्य मंत्रालय की संयुक्त बैठक में मूल्यवर्धन, निर्यात रणनीति और मछुआरों की आय बढ़ाने पर हुआ मंथन

हलधर किसान नई दिल्ली। भारत के समुद्री खाद्य निर्यात को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने और मछुआरों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। 14 मई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल तथा केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं दुग्ध उत्पादन एवं पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह ने संयुक्त रूप से मत्स्य निर्यात को बढ़ावा देने की रणनीतियों पर चर्चा की। बैठक में उत्पादन, प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन, निर्यात संवर्धन और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय समुद्री उत्पादों की पहुंच बढ़ाने के उपायों पर विस्तार से विचार किया गया।

बैठक का मुख्य फोकस वाणिज्य विभाग और मत्स्य विभाग की योजनाओं के बेहतर समन्वय के जरिए भारत की मत्स्य निर्यात क्षमता को मजबूत करना रहा। इसके तहत विशेष रूप से अंतर्देशीय राज्यों में मीठे पानी की मछलियों के निर्यात की संभावनाओं को बढ़ाने, निर्यात अंतर की पहचान करने और नई रणनीतियां विकसित करने पर जोर दिया गया।

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में समुद्री खाद्य निर्यात के क्षेत्र में रिकॉर्ड प्रदर्शन किया है। देश का समुद्री खाद्य निर्यात बढ़कर 72,325.82 करोड़ रुपये (8.28 अरब डॉलर) तक पहुंच गया है, जो अब तक का सर्वाधिक स्तर है। इसके मुकाबले वित्त वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा 62,408 करोड़ रुपये (7.45 अरब डॉलर) था। उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि को और आगे बढ़ाने के लिए प्रजातियों के विविधीकरण, ब्रांडिंग और मूल्यवर्धन पर विशेष ध्यान देना होगा।

उन्होंने गहरे समुद्र में मत्स्य संसाधनों के उपयोग, प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाने और पंजीकृत निर्यातकों की संख्या में वृद्धि की आवश्यकता पर भी बल दिया। साथ ही क्षेत्रीय मत्स्य प्रबंधन संगठनों (RFMO) में भारत की भागीदारी बढ़ाने और अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली को मजबूत करने की बात कही।

वहीं केंद्रीय मत्स्य मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कहा कि मत्स्य विभाग ने एमपीईडीए (MPEDA), ईआईसी (EIC), समुद्री खाद्य निर्यातकों और अन्य हितधारकों के साथ मिलकर ट्रेसबिलिटी, प्रसंस्करण, प्रमाणीकरण और मूल्यवर्धन के क्षेत्र में कई पहल की हैं। उन्होंने कहा कि कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने और निर्यात गुणवत्ता सुधारने के लिए प्रत्येक जिले में कम से कम एक प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित किया जाना चाहिए।

उन्होंने निर्यातकों के लिए कौशल विकास और बाजार की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाने पर भी जोर दिया। साथ ही एमपीईडीए और राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (NFDB) से अंतर्देशीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में निर्यात की कमियों का आकलन कर प्रजातिवार निर्यात क्षमता पहचानने का आग्रह किया।

बैठक में अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप जैसे क्षेत्रों में टूना जैसी उच्च मूल्य वाली प्रजातियों के निर्यात की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि इन क्षेत्रों में संसाधनों का बेहतर उपयोग भारत के निर्यात को नई गति दे सकता है।

मत्स्य विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार मानकों को पूरा करने के लिए ट्रेसबिलिटी यानी उत्पाद की पूरी जानकारी दर्ज रखने की प्रणाली बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार ने मूल्य श्रृंखला मजबूत करने और निर्यात तंत्र को सहयोग देने के लिए 34 मत्स्य उत्पादन एवं प्रसंस्करण क्लस्टर अधिसूचित किए हैं।

बैठक में विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए समुद्री खाद्य निर्यात बढ़ाने का रोडमैप तैयार किया गया। इसमें बुनियादी ढांचे का विकास, बाजार विस्तार, निर्यात विविधीकरण, नियामक सुधार और तकनीकी उन्नयन को प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल किया गया।

झींगा निर्यात बना सबसे बड़ा आधार
आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में जमे हुए झींगे (फ्रोजन श्रिम्प) भारत के समुद्री खाद्य निर्यात की रीढ़ बने रहे। झींगा निर्यात से 47,973 करोड़ रुपये की आय हुई, जो कुल निर्यात आय का दो-तिहाई से अधिक हिस्सा है।

सरकार ने हाल के वर्षों में अमेरिका सहित कई देशों के मानकों के अनुरूप निर्यात व्यवस्था मजबूत करने, एंटीबायोटिक नियंत्रण बढ़ाने, समुद्री जीव संरक्षण उपाय लागू करने तथा राष्ट्रीय ट्रेसबिलिटी फ्रेमवर्क-2025 शुरू करने जैसे कदम उठाए हैं। इसके अलावा ईईजेड नियम एवं हाई सी गाइडलाइंस-2025 को लागू कर निर्यात उन्मुख और सतत मत्स्य पालन को बढ़ावा दिया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन और वैश्विक बाजार रणनीति पर निरंतर काम किया गया तो आने वाले वर्षों में भारत विश्व समुद्री खाद्य व्यापार में और मजबूत स्थिति हासिल कर सकता है। इससे न केवल निर्यात बढ़ेगा बल्कि लाखों मछुआरों और मत्स्य पालकों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

यह भी पढेंः- कृषि आदान व्यापारियों के हित में सक्रिय पदाधिकारियों को फिर मिली बड़ी जिम्मेदारी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *