हलधर किसान (जल)।दिल्ली के यमुना से जहरीला झाग को खत्म करने के लिए दिल्ली जल बोर्ड के कर्मचारी नाव पर सवार होकर लगातार केमिकल का छिड़काव कर रहे हैं. छठ पर्व से पहले यमुना को साफ और स्वच्छ करने को लेकर पिछले दो दिनों से केमिकल छिड़काव का काम जारी है. बावजूद इसके जहरीला झाग कम होता नहीं दिख रहा. शनिवार सुबह भी कालिंदी कुंज में यमुना नदी में बड़ी मात्रा में झाग नजर आया.
यमुना नदी में फूल-पत्तियों के चलते टोटल ऑर्गेनिक कार्बन (टीओसी) बन रहा है और पानी में हलचल (टर्बुलेंस) होने पर झाग में तब्दील हो जाता है। यह खुलासा नई रिसर्च में हुआ है। झाग के कारणों का पता लगाने के लिए जल बोर्ड ने रिसर्च शुरू की है। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया और यूरोपियन देशों में नदियों के पानी के झाग को लेकर पहले जो रिसर्च स्टडी की है,
उन रिपोर्ट्स को भी जल बोर्ड अफसर खंगाल रहे हैं। दो दिनों के रिसर्च में दूसरी वजह जो सामने आई है, वह है घरों में इस्तेमाल होने वाले डिटर्जेंट। जल बोर्ड के सीनियर अफसरों के अनुसार ओखला बैराज से आगे डाउन स्ट्रीम में करीब एक से डेढ़ किमी तक यमुना के पानी के ऊपर झाग तैर रहा है। बार-बार इसी एरिया में झाग क्यों बनता है, इस पर रिसर्च के लिए एक टीम बनाई गई है।

पिछले दो दिनों से टीम अलग-अलग जगहों को पानी का सैंपल लेकर उस पर रिसर्च कर रही है। अफसरों का कहना है कि यमुना के पानी में झाग के कई कारण हैं। पल्यूशन उनमें से एक है। इसके अलावा भी कई कारण हो सकते हैं। उन कारणों को जाने के लिए ही रिसर्च की जा रही है।
शुरुआती रिसर्च में यह पता चला है कि यमुना के पानी में फूल-पत्तियों की वजह से झाग पैदा हो रहे हैं। जल बोर्ड अफसरों के अनुसार फूल-पत्तियों के पानी में घुल कर टोटल ऑर्गेनिक कार्बन (टीओसी) पैदा करते हैं। पानी में टर्बुलेंस होते ही टीओसी झाग के रूप में तब्दील हो जाता है।
ओखला बैराज के पास पानी काफी ऊंचाई से गिरता है, जिसके चलते पानी में टर्बुलेंस बहुत ज्यादा होता है और यह झाग पैदा करता है। 4-5 दिनों में रिसर्च पूरी हो जाएगी। जल बोर्ड के सीनियर अफसरों का कहना है कि यमुना के पानी में झाग का दूसरा कारण है कि घरों में इस्तेमाल होने वाले डिटर्जेंट। डिटर्जेंट में फॉस्फेट होता है और लोगों के घरों से निकलकर यमुना में आ रहा है।
जो झाग पैदा कर रहा है। दिल्ली जल बोर्ड अफसरों का कहना है कि यमुना के पानी में बार बार झाग की समस्या क्यों हैं, इस पर रिसर्च के अलावा अलग-अलग देशों में नदियों के पानी में झाग बनने को लेकर जो रिसर्च हुई है, उसकी भी स्टडी की जा रही है।
ऑस्ट्रेलिया में एक जगह ऐसा ही बैराज बना है और वहां जो स्टडी की गई थी उसमें भी फूल-पत्तियों के चलते ही झाग की समस्या बताई गई है। रिसर्च पूरी होने के बाद झाग को पूरी तरह से खत्म करने की कवायदें जल बोर्ड शुरू करेगा।

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भारत ने झींगा मछली क्षेत्र के लिए सहयोग बढ़ाया; बीते पांच वर्ष से अमेरिका को सीफूड का निर्यात मजबूत बना हुआ है l

हलधर किसान, नई दिल्ली सरकार ने बाजार में विविधता लाने और भारत के सीफूड निर्यात क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कई पहल की हैं।वाणिज्य विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में एक वैधानिक निकाय, समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एमपीईडीए) व्यापार प्रतिनिधिमंडल भेजकर, खरीदने-बेचने वालों के बीच बैठकें आयोजित करके और एशिया व यूरोप में प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय सीफूड मेलों में भाग लेकर सीफूड निर्यात बाजार में विविधता लाने के लिए सक्रिय तौर पर काम कर रहा है। 2025 में चेन्नई और नई दिल्ली में आयोजित रिवर्स क्रेता-विक्रेता बैठकों से 100 से क्रेता-निर्यातकों की बातचीत हुई।एमपीईडीए निर्यातकों को नए अवसरों का लाभ उठाने में मदद करने के लिए कई एफटीए पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजितकर रहा है।वाणिज्य विभाग बाजार पहुंच के मुद्दों को हल करने के लिए, विशेष रूप से ईयू के साथ, एफटीए वार्ताओं को तेज करने के लिए प्रयास कर रहा है भारत सरकार के मत्स्य पालन विभाग ने ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, इंडोनेशिया, जापान, थाईलैंड, यूनाइटेड किंगडम और रूस के दूतावासों/ उच्चायोगों के साथ कई बैठकें की हैं इन चर्चाओं में, अन्य बातों के साथ ही, व्यापार संबंधों को मजबूत करना, मूल्य संवर्धन, गुणवत्ता आश्वासन, जैव सुरक्षा और गुणवत्ता अनुपालन, कोल्ड-चेन में सुधार, प्रसंस्करण, स्वचालन, अनुसंधान और विकास सहयोग, और प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण जैसे विषय शामिल थे। बीते पांच वर्ष में अलग-अलग योजनाओं के अंतर्गत झींगा मछली के किसानों और निर्यातकों को दी गई कुल वित्तीय मदद नीचे दी गई है: झींगा मछली के किसानों को मदद करने के लिए ये कदम उठाए गए हैं: यह भी पढेंः- जिले में धान खरीदी ने पकड़ी रफ्तार: किसानों को मिल रहा उनकी उपज का वाजिब दाम Post Views: 11
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