हलधर किसान नई दिल्ली। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने किसानों के हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना को वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने को मंजूरी दे दी है। सरकार ने इस पांच वर्ष की अवधि के लिए योजना के तहत कुल 3.15 लाख करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय को स्वीकृति प्रदान की है। केंद्र सरकार के इस फैसले को देश के करोड़ों किसानों के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि किसानों की समृद्धि ही देश की आर्थिक और सामाजिक प्रगति की मजबूत नींव है।
पीएम-किसान योजना के माध्यम से पात्र भूमिधारक किसान परिवारों को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण यानी डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के जरिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है। योजना के तहत किसानों को हर वर्ष 6,000 रुपये की वित्तीय सहायता तीन समान किस्तों में सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाती है। इसका उद्देश्य किसानों को खेती-किसानी से जुड़ी आवश्यकताओं के लिए समय पर आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराना और उन्हें कृषि निवेश के लिए सक्षम बनाना है।
फरवरी 2019 में शुरू हुई थी पीएम-किसान योजना
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत फरवरी 2019 में की गई थी। शुरुआत से ही इस योजना को किसानों को सीधे आर्थिक सहायता पहुंचाने वाली एक महत्वपूर्ण केंद्रीय योजना के रूप में लागू किया गया। आधार आधारित प्रमाणीकरण, डिजिटल सत्यापन और डीबीटी प्रणाली के इस्तेमाल से योजना में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है।
सरकार के अनुसार, पीएम-किसान योजना के तहत अब तक 23 किस्तों में 4.47 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि किसानों के बैंक खातों में सीधे हस्तांतरित की जा चुकी है। वहीं, 23वीं किस्त के अंतर्गत 9.49 करोड़ से अधिक किसानों को लाभ मिला और उनके खातों में 18,984 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की गई।
कोविड-19 महामारी के कठिन दौर में भी पीएम-किसान योजना किसानों के लिए आर्थिक सहारे का महत्वपूर्ण माध्यम बनी। महामारी के दौरान किसानों को आर्थिक सहायता पहुंचाने के लिए योजना के तहत 1.71 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि वितरित की गई। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों और कृषि आधारित परिवारों को आर्थिक संकट से उबरने में मदद मिली।
महिला किसानों को भी मिला बड़ा लाभ
पीएम-किसान योजना का लाभ देश की महिला किसानों तक भी पहुंचा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, योजना के तहत महिला किसानों को 1.06 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्राप्त हुई है। योजना के कुल लाभार्थियों में लगभग हर चार में से एक लाभार्थी महिला किसान है। इससे कृषि क्षेत्र में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और उनकी भूमिका को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
सरकार का मानना है कि पीएम-किसान के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता किसानों को बीज, उर्वरक, सिंचाई, कृषि मशीनरी और अन्य कृषि आवश्यकताओं पर समय पर खर्च करने में मदद करती है। इससे किसानों को खेती के मौसम में आवश्यक संसाधन जुटाने में सहूलियत होती है और अनौपचारिक स्रोतों से कर्ज लेने की जरूरत भी कम हो सकती है।
स्वतंत्र मूल्यांकन में सामने आया योजना का सकारात्मक प्रभाव
पीएम-किसान योजना के प्रभाव का आकलन विभिन्न स्वतंत्र संस्थानों द्वारा भी किया गया है। नीति आयोग के विकास निगरानी एवं मूल्यांकन कार्यालय यानी डीएमईओ के मूल्यांकन के अनुसार, 92 प्रतिशत से अधिक लाभार्थियों ने बताया कि उन्होंने योजना के तहत प्राप्त सहायता राशि का इस्तेमाल कृषि गतिविधियों और कृषि निवेश के लिए किया।
वहीं, करीब 85 प्रतिशत लाभार्थियों ने कृषि आय में सुधार और अनौपचारिक ऋण पर निर्भरता कम होने की बात कही। इन आंकड़ों को सरकार पीएम-किसान योजना के सकारात्मक प्रभाव के रूप में देख रही है।
सरकार के अनुसार, वर्ष 2020-21 से 2025-26 के बीच कृषि क्षेत्र में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। इस अवधि में कृषि क्षेत्र में लगभग 9.65 प्रतिशत, उत्पादकता में करीब 10.53 प्रतिशत और कुल खाद्यान्न उत्पादन में लगभग 21.18 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। सरकार का कहना है कि यह वृद्धि कृषि क्षेत्र की बढ़ती क्षमता और किसानों को मिल रही विभिन्न प्रकार की सहायता को दर्शाती है।
डिजिटल तकनीक से किसानों तक पहुंच रही सहायता
पीएम-किसान योजना को डिजिटल इंडिया के प्रभावी उपयोग का उदाहरण भी बताया जा रहा है। आधार आधारित प्रमाणीकरण, डिजिटल लाभार्थी सत्यापन और डीबीटी व्यवस्था के जरिए आर्थिक सहायता सीधे किसानों के बैंक खातों में पहुंचाई जा रही है। इससे बिचौलियों की भूमिका कम करने और सहायता राशि को पारदर्शी तरीके से लाभार्थियों तक पहुंचाने में मदद मिली है।
सरकार के मुताबिक, पीएम-किसान योजना केवल किसानों को आर्थिक सहायता देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन्हें कृषि में निवेश करने, उत्पादन क्षमता बढ़ाने और अपनी आजीविका को मजबूत करने के लिए भी प्रोत्साहित कर रही है। नियमित आर्थिक सहायता से किसानों में आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
2030-31 तक जारी रहने से किसानों को मिलेगा निरंतर सहयोग
पीएम-किसान योजना को वर्ष 2030-31 तक जारी रखने का फैसला सरकार की किसान-केंद्रित नीतियों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अगले पांच वर्षों में 3.15 लाख करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय से किसानों को लगातार आय सहायता उपलब्ध कराने की योजना है।
सरकार का मानना है कि योजना के निरंतर विस्तार से किसानों की कृषि में निवेश करने की क्षमता बढ़ेगी, उत्पादकता में सुधार होगा, कृषि संबंधी जोखिमों से निपटने में मदद मिलेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
केंद्र सरकार के अनुसार, समृद्ध किसान ही विकसित भारत की मजबूत नींव हैं। पीएम-किसान योजना के माध्यम से देश के करोड़ों किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि वे आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर उत्पादन बढ़ा सकें और अपनी आय तथा आजीविका को मजबूत कर सकें। योजना का आगामी वर्षों तक जारी रहना किसानों के लिए निरंतर आर्थिक सहयोग और कृषि क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
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