उन्नत कृषि महोत्सव की घोषणा अब बनेगी खेतों में बदलाव की ठोस कहानी

The announcement of the Advanced Agriculture Festival

शिवराज सिंह चौहान ने दिल्ली में ली उच्चस्तरीय बैठक, चार जिलों के कृषि रोडमैप को बनाया राष्ट्रीय मॉडल

हलधर किसान नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मध्यप्रदेश के रायसेन, विदिशा, सीहोर और देवास जिलों के लिए तैयार विशेष कृषि रोडमैप को देश में कृषि परिवर्तन का मॉडल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। रायसेन में आयोजित “उन्नत कृषि महोत्सव” के दौरान घोषित इस महत्वाकांक्षी योजना को अब धरातल पर उतारने के लिए दिल्ली में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें मध्यप्रदेश के कृषि मंत्री एंदल सिंह कंसाना सहित केंद्र एवं राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

बैठक में शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने, जल संरक्षण, मिट्टी की उर्वरता सुधारने, वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देने तथा विभिन्न कृषि योजनाओं के प्रभावी अभिसरण का जवाबदेह मिशन है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में कृषि परिवर्तन का नया अभियान शुरू किया गया है, जिसका उद्देश्य किसानों की शुद्ध आय में वास्तविक वृद्धि सुनिश्चित करना है।

किसान की आय होगी सफलता का सबसे बड़ा पैमाना

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस रोडमैप की सफलता का आकलन किसानों की आय के आधार पर किया जाएगा। प्रत्येक जिले में वर्तमान कृषि आय का आकलन कर यह देखा जाएगा कि योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के बाद उसमें कितना सुधार हुआ। उन्होंने कहा कि समीक्षा बैठकों का उद्देश्य केवल प्रगति रिपोर्ट देखना नहीं, बल्कि परिणाम सुनिश्चित करना होगा।

शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि उन्होंने स्वयं चारों जिलों के खेतों का दौरा कर किसानों की समस्याओं को समझा है। भूजल स्तर में लगातार गिरावट, मिट्टी की सेहत में कमी और मेहनत के अनुरूप किसानों को आय नहीं मिलना प्रमुख चिंताएं हैं। इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए कृषि रोडमैप तैयार किया गया है।

जल संकट और अल नीनो से निपटने की रणनीति

बैठक में जल संकट और संभावित अल नीनो प्रभाव पर भी चर्चा हुई। केंद्रीय मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आगामी रबी सीजन को सुरक्षित रखने के लिए अभी से ठोस रणनीति तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियां भी अवसर बन सकती हैं, यदि वैज्ञानिक खेती और जल प्रबंधन के उपायों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।

“वन टीम, वन टॉस्क” के मंत्र पर होगा काम

शिवराज सिंह चौहान ने राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर पर गठित समितियों को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि केवल समितियों का गठन पर्याप्त नहीं है, बल्कि हर स्तर पर जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने “वन टीम, वन टॉस्क” के सिद्धांत पर कार्य करने और “कौन, क्या और कब तक” की स्पष्ट जिम्मेदारी निर्धारित करने पर जोर दिया।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY), राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (NFSM), राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन (NMEO), मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH) तथा कृषि यंत्रीकरण योजना (SMAM) जैसी योजनाओं का लाभ किसानों तक एकीकृत रूप में पहुंचाया जाएगा, ताकि खेत स्तर पर इनका प्रत्यक्ष प्रभाव दिखाई दे।

फसल विविधीकरण और समेकित कृषि प्रणाली पर जोर

कृषि रोडमैप में फसल विविधीकरण को प्रमुख स्थान दिया गया है। विदिशा में सोयाबीन-मक्का अंतरफसल प्रणाली, सीहोर में उच्च मूल्य फसलें, रायसेन में धान-लहसुन मॉडल तथा देवास में मक्का-लहसुन-प्याज आधारित कृषि प्रणाली को बढ़ावा दिया जाएगा।

इसके साथ ही समेकित कृषि प्रणाली को भी बढ़ावा दिया जाएगा, जिसमें खेती के साथ डेयरी, मत्स्य पालन और बागवानी को जोड़ा जाएगा। केंद्रीय मंत्री ने निर्देश दिए कि खरीफ 2026 से प्रत्येक जिले के कम से कम एक ब्लॉक में इस मॉडल का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाए।

मृदा स्वास्थ्य, सूक्ष्म सिंचाई और कृषि यंत्रीकरण पर विशेष ध्यान

बैठक में मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरण, सूक्ष्म सिंचाई योजनाओं की प्रगति, कृषि यंत्रों की उपलब्धता तथा प्रत्येक ब्लॉक में कस्टम हायरिंग सेंटर की कार्यशीलता की समीक्षा भी की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि किसानों को आधुनिक तकनीक और उपकरण समय पर उपलब्ध कराए जाएं।

एफपीओ और बागवानी क्षेत्र को मिलेगा बढ़ावा

किसान उत्पादक संगठनों (FPO) को बाजार से जोड़ने तथा बागवानी क्षेत्र को मजबूत बनाने पर भी जोर दिया गया। MIDH योजना के तहत नर्सरी, कोल्ड स्टोरेज और कोल्ड चेन परियोजनाओं को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए। इससे किसानों को उत्पादन से लेकर विपणन तक बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

किसान प्रशिक्षण बनेगा सफलता की कुंजी

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि किसी भी कृषि परिवर्तन की सफलता किसानों के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण पर निर्भर करती है। इसके लिए कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) की सक्रिय भूमिका सुनिश्चित की जाएगी। भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान और केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान, भोपाल जैसे संस्थानों की विशेषज्ञता का भी लाभ लिया जाएगा। प्रत्येक ब्लॉक में कम से कम एक अग्रणी किसान तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है, जो अन्य किसानों के लिए प्रेरक की भूमिका निभाएगा।

रायसेन के उन्नत कृषि महोत्सव में की गई घोषणा अब एक ठोस क्रियान्वयन ढांचे का रूप लेती दिखाई दे रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मॉडल सफल होता है तो मध्यप्रदेश के ये चार जिले देश में कृषि नवाचार, जल प्रबंधन, वैज्ञानिक खेती, फसल विविधीकरण और किसान आय वृद्धि के आदर्श उदाहरण बन सकते हैं।

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