अवैध बीटी कपास बीज की बिक्री पर सख्ती, व्यापारी और किसान दोनों रहें सतर्क

Crackdown on sale of illegal Bt cotton seeds traders and farmers should be cautious

सूचना देने वालों को मिलेगा ₹5000 का इनाम, टोल फ्री नंबर जारी

हलधर किसान भोपाल/इंदौर। मध्य प्रदेश के कपास उत्पादक जिलों में अवैध बीटी कपास बीज की बिक्री को लेकर कृषि विभाग और जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। प्रदेश के कृषि आदान विक्रेता संघ के पदाधिकारियों ने भी व्यापारियों और किसानों से अपील की है कि वे केवल वैध एवं अधिकृत कंपनियों के बीटी कपास बीज का ही उपयोग करें। साथ ही अवैध बीजों की बिक्री या भंडारण की जानकारी मिलने पर तुरंत विभाग को सूचित करें।

प्रदेश के जिन जिलों में प्रमुख रूप से बीटी कपास की खेती की जाती है, उनमें बड़वानी, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर, धार, रतलाम सहित आसपास के क्षेत्र शामिल हैं। इन क्षेत्रों में हर वर्ष बड़ी मात्रा में कपास की बुवाई होती है। इसी का फायदा उठाकर कुछ लोग गुजरात, महाराष्ट्र तथा अन्य राज्यों से बिना अनुमति और बिना बिल के अवैध बीटी कपास बीज लाकर बेचने का प्रयास करते हैं।

मध्य प्रदेश कृषि आदान विक्रेता संघ के उपाध्यक्ष एवं धार, बड़वानी, खरगोन, खंडवा तथा बुरहानपुर के संभागीय अध्यक्ष श्री कृष्णा दुबे ने बताया कि ऐसे बीजों का व्यापार किसानों और विक्रेताओं दोनों के लिए गंभीर संकट खड़ा कर सकता है। उन्होंने कहा कि अल्पकालिक लाभ के लालच में यदि कोई व्यापारी अवैध बीज बेचता है तो भविष्य में उसे भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

किसानों को हो सकता है बड़ा नुकसान

विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध और अप्रमाणित बीटी कपास बीजों की गुणवत्ता की कोई गारंटी नहीं होती। ऐसे बीजों में अंकुरण क्षमता कम हो सकती है, फसल की वृद्धि प्रभावित हो सकती है या कीट एवं रोगों का प्रकोप बढ़ सकता है। यदि किसानों को अपेक्षित उत्पादन नहीं मिलता है तो आर्थिक नुकसान के साथ-साथ उनकी खेती भी प्रभावित होगी।

कृषि क्षेत्र के जानकारों के अनुसार यदि बड़े पैमाने पर अवैध बीजों का उपयोग किया गया और फसल प्रभावित हुई तो किसानों में असंतोष बढ़ सकता है तथा प्रशासन और कृषि विभाग पर दबाव की स्थिति बन सकती है। ऐसी परिस्थिति में सबसे पहले जांच का दायरा उन विक्रेताओं तक पहुंचेगा जिन्होंने संबंधित बीजों की बिक्री की होगी।

व्यापारियों के लिए भी जोखिम

श्री दुबे ने कहा कि वैध कंपनियों के बीजों की तुलना में अवैध बीजों में अधिक मुनाफा दिखाई दे सकता है, लेकिन किसी शिकायत या जांच की स्थिति में पूरा नुकसान विक्रेता को उठाना पड़ सकता है। कृषि विभाग द्वारा लाइसेंस संबंधी कार्रवाई, माल जब्ती, प्रतिष्ठान की जांच तथा अन्य कानूनी कदम उठाए जा सकते हैं।

उन्होंने कहा कि वर्षों की मेहनत से बनाई गई दुकान और प्रतिष्ठा एक गलत निर्णय के कारण खतरे में पड़ सकती है। किसान जिस विश्वास के आधार पर बीज खरीदते हैं, वह भरोसा टूटने पर व्यापारी की साख भी प्रभावित होती है।

सूचना देने वालों को मिलेगा इनाम

अवैध बीटी कपास बीज की बिक्री पर रोक लगाने के लिए प्रशासन ने विशेष व्यवस्था की है। यदि किसी व्यक्ति को ऐसे बीजों के भंडारण, परिवहन या बिक्री की जानकारी मिलती है तो वह इसकी सूचना विभाग को दे सकता है।

प्रशासन ने सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखने का आश्वासन दिया है। साथ ही सही सूचना देने वाले को ₹5000 का प्रोत्साहन पुरस्कार भी दिया जाएगा।

टोल फ्री नंबर जारी

अवैध बीटी कपास बीज की बिक्री या भंडारण की जानकारी देने के लिए विभाग द्वारा टोल फ्री नंबर – 292915 जारी किया गया है। नागरिक, किसान या व्यापारी इस नंबर पर संपर्क कर जानकारी दे सकते हैं। सूचना प्राप्त होने के बाद संबंधित विभाग जांच कर आवश्यक कार्रवाई करेगा।

केवल अधिकृत कंपनियों के बीज ही खरीदें

कृषि आदान विक्रेता संघ ने किसानों और व्यापारियों दोनों से आग्रह किया है कि वे केवल उन्हीं कंपनियों के बीटी कपास बीज खरीदें और बेचें जिन्हें केंद्र एवं राज्य सरकार से वैध अनुमति प्राप्त है। बीज खरीदते समय पक्का बिल, लॉट नंबर, बैच नंबर और अन्य आवश्यक दस्तावेज अवश्य लें।

वैध कंपनियों के बीजों में यदि अंकुरण, गुणवत्ता या उत्पादन संबंधी कोई समस्या आती है तो किसान और व्यापारी दोनों संबंधित कंपनी, कृषि विभाग और प्रशासन से सहायता प्राप्त कर सकते हैं। वहीं अवैध बीजों के मामले में जवाबदेही तय करना कठिन हो जाता है।

किसानों और व्यापारियों से अपील

कृषि विभाग एवं कृषि आदान विक्रेता संघ ने सभी किसानों और विक्रेताओं से अपील की है कि वे अल्पकालिक लाभ के बजाय सुरक्षित और वैध व्यापार को प्राथमिकता दें। अवैध बीटी कपास बीजों से दूरी बनाकर ही किसानों के हितों की रक्षा की जा सकती है और प्रदेश में कपास उत्पादन को सुरक्षित रखा जा सकता है।

श्री दुबे ने बताया कि इस मामले में केवल विभाग ही नहीं, बल्कि वे कंपनियां भी जिम्मेदार हैं जिन्होंने वैध रूप से बीटी कपास बीज के विक्रय की अनुमति प्राप्त कर प्रदेश में अपने उत्पादों की बिक्री कर रही हैं। ऐसी कंपनियों को भी विभाग के साथ कदम से कदम मिलाकर अवैध बीटी कपास बीज की बिक्री पर रोक लगाने के लिए ठोस और योजनाबद्ध प्रयास करने चाहिए।

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उन्होंने कहा कि जिन कंपनियों के बीटी कपास बीज को विधिवत अनुमति प्राप्त है और जिनकी प्रदेश में नियमित आपूर्ति हो रही है, उनकी भी यह नैतिक एवं व्यावसायिक जिम्मेदारी बनती है कि वे किसानों और व्यापारियों को जागरूक करें तथा अवैध बीजों के कारोबार को रोकने में सक्रिय सहयोग दें। वर्तमान में यह कार्य संगठन द्वारा किया जा रहा है, जबकि इसमें संबंधित कंपनियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होनी चाहिए।

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