मथुरा में पशु चिकित्सा एवं अनुसंधान सुविधाओं का अवलोकन

Inspection of veterinary and research facilities in Mathura

सचिव ने पशुधन विकास में तकनीक और अवसंरचना को बताया महत्वपूर्ण

हलधर किसान मथुरा। केंद्रीय पशुपालन और डेयरी विभाग (डीएएचडी) के सचिव श्री नरेश पाल गंगवार ने 17 जून 2026 को उत्तर प्रदेश के मथुरा स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गौ अनुसंधान संस्थान (डीयूवीएएसयू) का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक, अनुसंधान, पशु स्वास्थ्य एवं पशुधन विकास से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा की तथा पशु चिकित्सा अवसंरचना को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

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दौरे के दौरान सचिव श्री गंगवार ने विश्वविद्यालय की प्रमुख सुविधाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने टीचिंग वेटरनरी क्लिनिकल कॉम्प्लेक्स (टीवीसीसी), लाइवस्टॉक फार्म कॉम्प्लेक्स (एलएफसी), आधुनिक प्रयोगशालाओं, शिक्षण एवं प्रशिक्षण केंद्रों तथा पशुधन विकास से संबंधित विभिन्न इकाइयों का अवलोकन किया। उन्होंने विश्वविद्यालय में उपलब्ध आधुनिक तकनीकों और अनुसंधान कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे संस्थान देश के पशुधन क्षेत्र को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

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विशेष रूप से सचिव ने विश्वविद्यालय की बकरी इकाई का दौरा किया, जहां उन्नत प्रजनन तकनीकों और प्रजनन जैव-प्रौद्योगिकी कार्यक्रमों के बारे में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने बकरी पालन क्षेत्र में किए जा रहे अनुसंधान कार्यों में गहरी रुचि दिखाई और इसे छोटे एवं सीमांत पशुपालकों के लिए लाभकारी बताया। इस अवसर पर उन्होंने बकरी इकाई में स्थापित आधुनिक बकरी वीर्य फ्रीजिंग सुविधा केंद्र का भी निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि श्रेष्ठ आनुवंशिक गुणों वाले जर्मप्लाज्म का संरक्षण एवं प्रसार पशुधन की उत्पादकता बढ़ाने के लिए अत्यंत आवश्यक है।

श्री गंगवार ने विश्वविद्यालय द्वारा बकरी नस्लों के आनुवंशिक सुधार, संरक्षण और संवर्धन के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि आधुनिक प्रजनन तकनीकों का उपयोग कर पशुपालकों को बेहतर नस्ल के पशु उपलब्ध कराए जा सकते हैं, जिससे दूध, मांस और अन्य पशुधन उत्पादों के उत्पादन में वृद्धि होगी। साथ ही इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय के अवसर भी बढ़ेंगे।

पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए सचिव ने विश्वविद्यालय परिसर में “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के अंतर्गत वृक्षारोपण कार्यक्रम में भाग लिया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और पर्यावरण संतुलन बनाए रखना कृषि एवं पशुधन विकास के लिए समान रूप से आवश्यक है। वृक्षारोपण जैसी पहलें आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और स्वस्थ पर्यावरण सुनिश्चित करने में सहायक सिद्ध होंगी।

दौरे के दौरान दीनदयाल उपाध्याय सभागार में एक संवादात्मक सत्र का भी आयोजन किया गया, जिसमें विश्वविद्यालय के संकाय सदस्य, वैज्ञानिक, शोधकर्ता एवं छात्र शामिल हुए। इस सत्र में पशु स्वास्थ्य, डेयरी विकास, पशुपालन आधारित उद्यमिता, अनुसंधान एवं नवाचार तथा भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रतिभागियों ने पशुपालन क्षेत्र की चुनौतियों और उनके समाधान से संबंधित अपने विचार भी साझा किए।

अपने संबोधन में श्री गंगवार ने कहा कि देश में पशुधन क्षेत्र की तेजी से बढ़ती आवश्यकताओं को देखते हुए पशु चिकित्सा अवसंरचना का सुदृढ़ीकरण समय की मांग है। उन्होंने आधुनिक पशु चिकित्सालयों, उन्नत निदान प्रयोगशालाओं, कृत्रिम गर्भाधान एवं प्रजनन सुविधाओं तथा डिजिटल एवं तकनीक आधारित पशु स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर विशेष जोर दिया। उनका कहना था कि मजबूत पशु स्वास्थ्य व्यवस्था न केवल पशुधन उत्पादकता बढ़ाने में सहायक होगी, बल्कि रोग नियंत्रण और पशुपालकों की आर्थिक सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

उन्होंने विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं से आह्वान किया कि वे अपने अनुसंधान को केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित न रखें, बल्कि ऐसे व्यावहारिक और क्षेत्र आधारित समाधान विकसित करें जिनका सीधा लाभ किसानों और पशुपालकों को मिल सके। उन्होंने कहा कि नवाचार और अनुसंधान तभी सफल माने जाएंगे जब उनका प्रभाव गांवों और खेतों तक पहुंचे।

विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अभिजीत मित्रा ने संस्थान की उपलब्धियों, अनुसंधान परियोजनाओं, कौशल विकास कार्यक्रमों तथा पशुधन क्षेत्र में दिए जा रहे योगदान की जानकारी प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय पशु स्वास्थ्य, प्रजनन तकनीक, रोग नियंत्रण और पशुपालक प्रशिक्षण के क्षेत्र में लगातार महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है।

यह दौरा विश्वविद्यालय और केंद्रीय पशुपालन एवं डेयरी विभाग के बीच सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे प्रयासों से राष्ट्रीय पशुधन विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद मिलेगी तथा किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी।

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