हलधर किसान नई दिल्ली। प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में देश में गरीबों के उत्थान और गांवों के विकास का एक नया मॉडल उभरकर सामने आया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण व ग्रामीण विकास मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने राज्यसभा में चर्चा के दौरान कहा कि सरकार की योजनाएं अब सीधे अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक पहुंच रही हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रही हैं।
श्री चौहान ने अपने विस्तृत भाषण में Mahatma Gandhi की विचारधारा का उल्लेख करते हुए कहा कि बापू आज भी देश की नीतियों में जीवित हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की सभी योजनाएं “अंतिम व्यक्ति” को ध्यान में रखकर बनाई जा रही हैं, जिससे समाज के सबसे कमजोर वर्ग को भी लाभ मिल सके।
मनरेगा का उन्नत रूप: “विकसित भारत–जी राम जी”
केंद्रीय मंत्री ने “विकसित भारत–जी राम जी” योजना को मनरेगा का उन्नत संस्करण बताया। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत अब 100 दिन की बजाय 125 दिन का वैधानिक रोजगार मिलेगा। इसके साथ ही मजदूरों को बेहतर मजदूरी, बेरोजगारी भत्ता और भुगतान में देरी होने पर ब्याज जैसी कानूनी सुरक्षा भी दी जाएगी।
उन्होंने जानकारी दी कि इस योजना के लिए केंद्र सरकार ने 95,692 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जो अब तक का सबसे बड़ा बजट है। खास बात यह है कि देश के लगभग सभी राज्यों ने अपने-अपने बजट में इस योजना के लिए राशि निर्धारित की है, जिससे इसकी व्यापक स्वीकार्यता स्पष्ट होती है।
गरीब और किसान केंद्रित योजनाओं का असर
श्री चौहान ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में केंद्र सरकार ने गरीबों और किसानों के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं लागू की हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत करोड़ों पक्के घर बनाए गए हैं, जबकि 11 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण हुआ है। उज्ज्वला योजना से करोड़ों परिवारों को गैस कनेक्शन मिला है और हर घर नल-जल योजना से ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की सुविधा बढ़ी है।
इसके अलावा आयुष्मान भारत योजना के तहत गरीबों को 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिल रहा है। 80 करोड़ से अधिक लोगों को मुफ्त राशन दिया जा रहा है, वहीं किसान सम्मान निधि के माध्यम से किसानों के खातों में सीधे आर्थिक सहायता पहुंचाई जा रही है। जन औषधि केंद्रों से सस्ती दवाइयां और मुद्रा योजना के तहत करोड़ों लोगों को स्वरोजगार के लिए ऋण भी उपलब्ध कराया गया है।
‘लखपति दीदी’ से बढ़ रहा महिला सशक्तिकरण
महिला सशक्तिकरण पर जोर देते हुए श्री चौहान ने कहा कि आज स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से करोड़ों महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं। “लखपति दीदी” मॉडल के तहत महिलाएं न केवल आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं, बल्कि गांव की अर्थव्यवस्था में भी अहम भूमिका निभा रही हैं।
उन्होंने बताया कि “ड्रोन दीदी”, “कृषि सखी”, “बैंक सखी” और “पशु सखी” जैसे नवाचारों ने ग्रामीण महिलाओं को नई पहचान दी है। सरकार का लक्ष्य अब 6 करोड़ “लखपति दीदी” तैयार करने का है, जिससे गांवों में रोजगार और आय के नए अवसर पैदा होंगे।
पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर
पश्चिम बंगाल में मनरेगा फंड रोकने के मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय राजनीतिक नहीं, बल्कि नियमों के उल्लंघन के कारण लिया गया था। उन्होंने बताया कि सोशल ऑडिट में फर्जी जॉब कार्ड, मशीनों से काम, ठेकेदारी और वित्तीय गड़बड़ियों जैसे गंभीर मामले सामने आए थे।
श्री चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार का उद्देश्य किसी राज्य की जनता को नुकसान पहुंचाना नहीं है, बल्कि योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। यही कारण है कि अन्य योजनाओं का पैसा राज्य को मिलता रहा।
विकसित भारत की ओर बढ़ता देश
अंत में श्री चौहान ने कहा कि आज भारत वैश्विक स्तर पर मजबूत स्थिति में है और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश आत्मनिर्भर और विकसित भारत की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह नया ग्रामीण विकास मॉडल आने वाले समय में किसानों, मजदूरों और महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव लाएगा।
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