हलधर किसान, अजमेर। शक्ति उपासना का पावन पर्व चैत्र नवरात्रि इस वर्ष 19 मार्च से आरंभ हो रहा है। इस बार तिथियों के विशेष संयोग के कारण नवरात्र 9 दिन के बजाय 8 दिन के रहेंगे। ज्योतिषाचार्य डॉ. सुदीप सोनी के अनुसार अष्टमी और नवमी तिथि 26 मार्च को एक साथ पड़ रही है, जिससे यह संयोग अत्यंत दुर्लभ और फलदायी माना जा रहा है।
डॉ. सोनी बताते हैं कि इस वर्ष नवरात्र में कई शुभ योग बन रहे हैं, जो साधना, पूजा और मांगलिक कार्यों के लिए विशेष लाभकारी रहेंगे। साथ ही 26 मार्च को ही नव संवत 2083 का शुभारंभ होगा, जिसका नाम ‘रौद्र’ रहेगा।

🔱 मां दुर्गा का आगमन-प्रस्थान पालकी में
इस वर्ष मां दुर्गा का आगमन और प्रस्थान दोनों ही पालकी में होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पालकी में आगमन को सुख-समृद्धि, शांति और कल्याण का संकेत माना जाता है। यह संकेत देता है कि वर्षभर सकारात्मक ऊर्जा और उन्नति का वातावरण बना रहेगा।
📅 अष्टमी-नवमी का विशेष संयोग
तिथियों के अनुसार:
- अष्टमी तिथि: 25 मार्च दोपहर 1:51 बजे से 26 मार्च सुबह 11:49 बजे तक
- नवमी तिथि: 25 मार्च सुबह 11:50 बजे से 27 मार्च सुबह 10:07 बजे तक
सामान्यतः पूजा और पर्व सूर्योदय की तिथि के आधार पर मनाए जाते हैं, लेकिन भगवान श्रीराम का जन्म चैत्र शुक्ल नवमी को दोपहर 12 बजे हुआ था। इसी परंपरा के अनुसार 26 मार्च को ही राम नवमी मनाई जाएगी।
इस दिन मां दुर्गा के आठवें और नौवें स्वरूप—महागौरी और सिद्धिदात्री—की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। श्रद्धालु इस दिन कन्या पूजन और हवन आदि भी करेंगे।
🪔 घट स्थापना के शुभ मुहूर्त
नवरात्र के प्रथम दिन घट स्थापना का विशेष महत्व होता है। इस बार शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:
- शुभ चौघड़िया: सुबह 6:54 से 8:06 बजे तक
- चर व लाभ चौघड़िया: सुबह 11:05 से दोपहर 1:30 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:01 से 12:58 बजे तक
विद्वानों के अनुसार अभिजीत मुहूर्त में घट स्थापना करना सर्वश्रेष्ठ माना गया है, क्योंकि इस समय सभी दोष समाप्त हो जाते हैं और पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
🌾 किसानों के लिए भी शुभ संकेत
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्र में बने शुभ योगों का प्रभाव खेती-किसानी पर भी पड़ता है। इस वर्ष मां दुर्गा का पालकी में आगमन वर्षा, फसल और समृद्धि के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में किसान इस पर्व को नई ऊर्जा और आशा के साथ मनाते हैं।
🙏 श्रद्धा और साधना का पर्व
चैत्र नवरात्रि केवल धार्मिक अनुष्ठान का समय नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम और साधना का भी अवसर है। भक्त इन दिनों व्रत, पूजा, जप और ध्यान के माध्यम से शक्ति की आराधना करते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
इस बार तिथियों के अनोखे संयोग और शुभ मुहूर्तों के कारण नवरात्र का महत्व और भी बढ़ गया है। ऐसे में श्रद्धालु पूरे उत्साह और भक्ति भाव के साथ इस पर्व को मनाने की तैयारी में जुट गए हैं।
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