जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित, खरगोन ने सहकारिता और किसान हितैषी सेवाओं के क्षेत्र में एक बार फिर नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए प्रदेशभर में अपनी अलग पहचान बनाई है। बैंक ने रबी उपार्जन, कृषि ऋण वितरण एवं वसूली, रासायनिक खाद वितरण, अमानत (डिपॉजिट) वृद्धि और लाभ अर्जित करने जैसे सभी प्रमुख क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। इन उपलब्धियों के चलते बैंक को मध्यप्रदेश के अग्रणी जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों में शामिल किया जा रहा है।
वर्ष 2025-26 के दौरान बैंक की वित्तीय स्थिति में भी उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया। बैंक की अमानत (डिपॉजिट) में पिछले वर्ष की तुलना में 259.28 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई। वहीं बैंक का सकल लाभ (ग्रॉस प्रॉफिट) वर्ष 2024-25 में 30.88 करोड़ रुपये था, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर 50.65 करोड़ रुपये हो गया। इसी प्रकार बैंक का शुद्ध लाभ (नेट प्रॉफिट) भी पिछले वर्ष 4.03 करोड़ रुपये से बढ़कर इस वर्ष 17.58 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यह वृद्धि बैंक की मजबूत वित्तीय प्रबंधन क्षमता और किसानों के बढ़ते विश्वास को दर्शाती है।
रबी विपणन वर्ष 2026-27 में बैंक ने खरगोन और बड़वानी जिले के 29 उपार्जन केंद्रों के माध्यम से गेहूं और चना उपार्जन का सफल संचालन किया। बैंक ने 13,193 किसानों से 7,77,549.90 मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन किया, जिसके बदले किसानों को 204.10 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया जा चुका है। इसके अलावा 4,415 किसानों से 14,277.75 मीट्रिक टन चना की खरीदी कर लगभग 83.88 करोड़ रुपये का भुगतान भी समय पर किया गया। समयबद्ध भुगतान व्यवस्था के कारण किसानों को आर्थिक राहत मिली और उन्हें अपनी अगली फसल की तैयारी में सुविधा प्राप्त हुई।
रासायनिक खाद वितरण के क्षेत्र में भी बैंक ने उत्कृष्ट कार्य किया। बैंक से संबद्ध खरगोन एवं बड़वानी जिले की 182 बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के माध्यम से वर्ष 2025-26 में 3,03,799 मीट्रिक टन रासायनिक खाद का भंडारण किया गया, जबकि 2,21,423 मीट्रिक टन खाद का वितरण किसानों तक पहुंचाया गया। इससे खरीफ और रबी दोनों सीजन में किसानों को समय पर पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध हो सका।
राज्य शासन द्वारा लागू ई-विकास पोर्टल के सफल संचालन में भी जिला सहकारी केंद्रीय बैंक खरगोन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस पोर्टल के माध्यम से खाद वितरण व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी और डिजिटल बनाया गया है। किसानों को उनकी पात्रता और फसल क्षेत्र के अनुसार ऑनलाइन टोकन जारी किए जा रहे हैं, जिससे खाद वितरण केंद्रों पर भीड़ कम हुई है और किसानों को बिना किसी परेशानी के समय पर खाद उपलब्ध हो रही है। डिजिटल व्यवस्था लागू होने से वितरण प्रणाली अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनी है।
कृषि ऋण वितरण और वसूली के क्षेत्र में भी बैंक ने प्रदेशभर में सर्वोच्च प्रदर्शन किया है। बैंक से संबद्ध 182 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को फसल ऋण उपलब्ध कराया गया। सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि ऋण वसूली में रही, जहां बैंक ने 76.79 प्रतिशत वसूली दर्ज की, जो पिछले वर्ष की तुलना में 0.32 प्रतिशत अधिक है। इस उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर जिला सहकारी केंद्रीय बैंक खरगोन प्रदेश में सर्वाधिक ऋण वसूली करने वाला जिला सहकारी केंद्रीय बैंक बन गया। यह उपलब्धि सहकारिता व्यवस्था की मजबूती और किसानों के भरोसे का प्रतीक मानी जा रही है।
बैंक की इन सभी उपलब्धियों का सबसे बड़ा लाभ किसानों को मिला है। समय पर फसल ऋण, शून्य प्रतिशत ब्याज योजना का लाभ, खाद की उपलब्धता, पारदर्शी वितरण व्यवस्था तथा उपज का समय पर भुगतान जैसी सुविधाओं ने किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बैंक लगातार शासन की किसान हितैषी योजनाओं को जमीनी स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का कार्य कर रहा है।
जिला सहकारी केंद्रीय बैंक खरगोन की मुख्य कार्यपालन अधिकारी संध्या रोकड़े ने बताया कि बैंक शासन, आयुक्त सहकारिता एवं पंजीयक सहकारी संस्थाएं भोपाल, अपेक्स बैंक भोपाल तथा संयुक्त आयुक्त सहकारिता एवं बैंक प्रशासक बी.एल. मकवाना के मार्गदर्शन में कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि बैंक का उद्देश्य किसानों को त्वरित, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराना है। सहकारिता के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में बैंक भविष्य में भी इसी प्रकार निरंतर कार्य करता रहेगा।
जिला सहकारी केंद्रीय बैंक खरगोन की यह सफलता न केवल बैंक की बेहतर कार्यप्रणाली का प्रमाण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि यदि सहकारिता संस्थाएं पारदर्शिता, तकनीक और किसानों के हित को प्राथमिकता दें, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति दी जा सकती है। बैंक की यह उपलब्धि पूरे प्रदेश के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल बनकर सामने आई है।
यह भी पढेंः- राजस्थान की भेड़-बकरियां चट कर रही निमाड़ का चारा, पशुपालकों ने राजस्थानी भेड़ों के प्रवेश पर रोक की उठाई मांग
