बीज उत्पादन में अनियमितताओं पर उठे सवाल, कृषि आदान व्यापारियों ने की सख्त निगरानी की मांग
नई दिल्ली। बीज कृषि उत्पादन का सबसे महत्वपूर्ण आधार माना जाता है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि गुणवत्तापूर्ण बीज ही बेहतर उत्पादन की गारंटी है। इसी उद्देश्य से भारत सरकार ने ब्रीडर सीड (Breeder Seed) के लिए नए गुणवत्ता मानक निर्धारित किए हैं। लंबे समय से बीज उत्पादकों द्वारा ब्रीडर सीड की गुणवत्ता, अंकुरण क्षमता, लेबलिंग और पैकिंग में अनियमितताओं की शिकायतें मिल रही थीं। इन्हीं शिकायतों को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय बीज प्रमाणीकरण बोर्ड की 23वीं बैठक (4 दिसंबर 2025) में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
बीज उत्पादन श्रृंखला में नाभिकीय बीज (Nucleus Seed) के बाद ब्रीडर सीड दूसरी महत्वपूर्ण कड़ी है। इसके बाद फाउंडेशन सीड तथा प्रमाणित एवं लेबल बीज तैयार किए जाते हैं। इसलिए ब्रीडर सीड की गुणवत्ता पूरी बीज उत्पादन प्रणाली की नींव मानी जाती है।
अनुवांशिक शुद्धता को लेकर फैली भ्रांति दूर
भारतीय न्यूनतम बीज प्रमाणीकरण मानकों (1971, 1988 एवं 2013) के अनुसार ब्रीडर सीड की अनुवांशिक शुद्धता 100 प्रतिशत होना आवश्यक नहीं है। मानकों में स्पष्ट उल्लेख है कि इसकी अनुवांशिक शुद्धता फाउंडेशन सीड से अधिक होनी चाहिए ताकि अगली पीढ़ी के बीज निर्धारित गुणवत्ता के अनुरूप तैयार हो सकें।
पहली बार तय हुए गुणवत्ता मानक
अब तक ब्रीडर सीड के अंकुरण, भौतिक शुद्धता, नमी तथा अन्य गुणवत्ता मानकों का स्पष्ट निर्धारण नहीं था। नए निर्णय के अनुसार ब्रीडर सीड के सभी मानक फाउंडेशन सीड से बेहतर होंगे। इसके अंतर्गत अंकुरण क्षमता, भौतिक शुद्धता, अन्य फसलों के बीजों की मिलावट, खरपतवार, नमी, कीट क्षति, फफूंद, विषाणु एवं निमेटोड प्रभावित बीजों की मात्रा निर्धारित सीमा से कम रखनी होगी। खेत (Field Standards) के मानक भी पहले से अधिक सख्त किए गए हैं।
लेबल पर वास्तविक गुणवत्ता होगी दर्ज
अब ब्रीडर सीड के लेबल पर न्यूनतम मानक नहीं, बल्कि प्रयोगशाला परीक्षण में प्राप्त वास्तविक अंकुरण एवं गुणवत्ता का उल्लेख करना अनिवार्य होगा। यदि किसी गेहूं की किस्म का अंकुरण 91 प्रतिशत पाया जाता है तो लेबल पर 91 प्रतिशत ही अंकित किया जाएगा।
अभी भी बनी हुई हैं कई अनियमितताएं
बीज उत्पादकों का कहना है कि अनेक कृषि विश्वविद्यालयों एवं सरकारी संस्थानों में आज भी ब्रीडर सीड वितरण के दौरान कई अनियमितताएं देखने को मिलती हैं। कई जगह अलग-अलग किस्मों को एक जैसे लॉट नंबर दिए जाते हैं, जिससे ट्रेसबिलिटी प्रभावित होती है।
इसके अलावा कई बार बीज के कट्टों पर लेबल सही तरीके से नहीं लगाए जाते, ब्रीडर के हस्ताक्षर नहीं होते, अधिकृत सील नहीं लगाई जाती तथा मॉनिटरिंग रिपोर्ट भी समय पर उपलब्ध नहीं कराई जाती। कई उत्पादकों को सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा कर बाद में लेबल एवं प्रमाण-पत्र लेने के लिए दोबारा जाना पड़ता है।
धुना हुआ बीज भी चिंता का विषय
बीज उत्पादकों के अनुसार कई बार ब्रीडर सीड उचित भंडारण एवं फ्यूमिगेशन के अभाव में धुना (Dusty) हुआ मिलता है। इसके बावजूद स्रोत (Source of Seed) बनाए रखने की मजबूरी में उत्पादक ऐसे बीज लेने को विवश हो जाते हैं।
संगठन के मार्गदर्शक आर. बी. सिंह के लेखों से मिल रही जागरूकता
ऑल इंडिया एग्री इनपुट डीलर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि संगठन के मार्गदर्शक एवं “बीज कानून रत्न” से सम्मानित श्री आर. बी. सिंह, जो भारत सरकार के उपक्रम नेशनल सीड्स कॉरपोरेशन में एरिया मैनेजर के पद पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं, वर्षों के अनुभव के आधार पर “बीज कानून पाठशाला” श्रृंखला के माध्यम से कृषि आदान व्यापारियों को लगातार महत्वपूर्ण कानूनी एवं तकनीकी जानकारी उपलब्ध करा रहे हैं। उनके लेखों से देशभर के कृषि आदान व्यापारियों को बीज कानूनों की सटीक और व्यवहारिक जानकारी मिल रही है, जिसके लिए संगठन ने उनका आभार व्यक्त किया।
सरकारी उपक्रमों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
संगठन का कहना है कि देश में बीज उत्पादन जैसे महत्वपूर्ण कार्य की जिम्मेदारी निभाने वाले कुछ सरकारी उपक्रमों एवं कृषि विश्वविद्यालयों में अपेक्षित स्तर की जवाबदेही दिखाई नहीं देती। यदि निजी क्षेत्र का कोई कृषि आदान व्यापारी छोटी सी भी गलती करता है तो विभागीय कार्रवाई तत्काल शुरू हो जाती है, जबकि सरकारी संस्थानों की कमियों पर अपेक्षित कठोरता नहीं दिखाई देती। इससे गुणवत्ता सुधार की प्रक्रिया प्रभावित होती है।
केंद्रीय कृषि मंत्रालय से सुधार की मांग
ऑल इंडिया एग्री इनपुट डीलर्स एसोसिएशन, नई दिल्ली के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं कृषि आदान विक्रेता संघ, मध्यप्रदेश के अध्यक्ष श्री मान सिंह राजपूत, राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं प्रदेश सचिव श्री संजय रघुवंशी, प्रदेश उपाध्यक्ष श्री कृष्णा दुबे, सदस्यता अभियान प्रभारी श्री विनोद जैन सहित अन्य पदाधिकारियों ने केंद्रीय कृषि मंत्रालय एवं संबंधित विभागों से आग्रह किया है कि भारत सरकार के अधीन संचालित बीज निगमों तथा अन्य कृषि संस्थानों की नियमित निगरानी की जाए और जहां भी अनियमितताएं हों, वहां तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
पदाधिकारियों का कहना है कि भारत कृषि प्रधान देश है और किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराना राष्ट्रीय जिम्मेदारी है। यदि सरकारी संस्थान भी निर्धारित मानकों का पूरी ईमानदारी से पालन करें तो कृषि उत्पादन, बीज गुणवत्ता और किसानों का विश्वास तीनों मजबूत होंगे तथा भारत कृषि क्षेत्र में और अधिक सशक्त बन सकेगा।

”बीज निरीक्षक की अधिनायक वादी प्रवृति“ आर.बी. सिंह, बीज कानून रत्न, एरिया मैनेजर (सेवानिवृत) नेशनल सीड्स
कारपोरेशन लि॰ (भारत सरकार का संस्थान) सम्प्रति – ”कला निकेतन“, ई-70, विथिका-11, जवाहर नगर, हिसार-125001 (हरियाणा), दूरभाष सम्पर्क-79883-04770, 94667-46625
यह भी पढेंः- बीज निरीक्षकों की अधिकार सीमा जानें – बीज कानून पाठशाला – 38
