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बीज घोटाले में बड़ा खुलासा: बीज निगम निदेशक समेत 6 गिरफ्तार, ₹2.44 करोड़ नकद बरामद

Major revelation in seed scam 6 arrested

नकली बीज मामले में कार्रवाई रोकने के बदले रिश्वत लेने का आरोप, एसीबी की बड़ी कार्रवाई

हलधर किसान समाचार कृषि क्षेत्र में किसानों के हितों से जुड़े एक बड़े भ्रष्टाचार मामले का खुलासा करते हुए भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने बीज निगम के निदेशक सहित छह लोगों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई 15 करोड़ रुपये मूल्य के कथित नकली मूंगफली बीज प्रकरण में की गई है, जिसमें आरोप है कि दोषी कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने तथा सीज किए गए बीजों को वापस गुजरात भेजने की अनुमति देने के बदले भारी रिश्वत ली गई।

एसीबी द्वारा की गई इस कार्रवाई में अब तक कुल 2.44 करोड़ रुपये नकद बरामद किए जा चुके हैं। इनमें बीज निगम के निदेशक जुगल किशोर बिश्नोई के निवास से 1.59 करोड़ रुपये तथा उनके भांजे स्वतंत्र बिश्नोई के पास से 85 लाख रुपये बरामद हुए हैं। अधिकारियों के अनुसार यह राशि कथित रिश्वतखोरी से जुड़ी हुई है।

छह आरोपी गिरफ्तार

एसीबी ने इस मामले में बीज निगम के निदेशक जुगल किशोर बिश्नोई, उनके भांजे स्वतंत्र बिश्नोई, कथित दलाल सुनील सेतिया, गुजरात की बीज कंपनी से जुड़े अधिकारी किरण कापड़िया, गणपत बिश्नोई तथा सतपाल को गिरफ्तार किया है। सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है तथा मामले की जांच विभिन्न स्तरों पर की जा रही है।

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार कृषि विभाग ने कुछ समय पहले गुजरात से जुड़े एक गोदाम में रखे मूंगफली बीजों की जांच की थी। जांच के दौरान बीजों की गुणवत्ता और वैधता को लेकर गंभीर सवाल सामने आए थे। इसके बाद संबंधित गोदाम पर कार्रवाई करते हुए बड़ी मात्रा में बीजों को सीज कर दिया गया था। बताया जा रहा है कि गोदाम में रखे बीजों की कुल कीमत लगभग 15 करोड़ रुपये थी।

एसीबी के अनुसार आरोप है कि इन सीज बीजों को वापस गुजरात भेजने तथा संबंधित कंपनियों और व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं करने के बदले करोड़ों रुपये की रिश्वत का लेन-देन किया गया। इसी सूचना के आधार पर एसीबी ने तकनीकी निगरानी और गुप्त जांच शुरू की।

फोन सर्विलांस से खुला राज

एसीबी को सूचना मिली थी कि लगभग दो करोड़ रुपये की रिश्वत का भुगतान किया जा चुका है। इसके बाद जांच एजेंसी ने पांच से अधिक मोबाइल नंबरों को निगरानी में लिया। तकनीकी विश्लेषण और बातचीत की निगरानी के दौरान यह संकेत मिले कि रिश्वत की राशि को अलग-अलग स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी चल रही है।

जांच में यह भी सामने आया कि निदेशक जुगल किशोर बिश्नोई के पास पहुंची राशि का एक हिस्सा श्रीगंगानगर भेजा जाना था। इसी सूचना के आधार पर एसीबी की टीम सक्रिय हुई।

चलती बस में पकड़ा गया भांजा

रविवार को जुगल किशोर बिश्नोई का भांजा स्वतंत्र बिश्नोई लगभग 85 लाख रुपये नकद लेकर बस से श्रीगंगानगर की ओर रवाना हुआ था। एसीबी टीम ने लूणकरणसर क्षेत्र में बस को रोककर कार्रवाई की और स्वतंत्र को नकदी सहित गिरफ्तार कर लिया।

सूत्रों के अनुसार पकड़े जाने पर स्वतंत्र ने प्रारंभिक पूछताछ में कहा कि बरामद राशि उसकी नहीं बल्कि उसके मामा जुगल किशोर बिश्नोई की है। इसके बाद एसीबी ने उसकी निशानदेही पर आगे की कार्रवाई करते हुए जयपुर में जुगल किशोर को हिरासत में लिया।

होटल और आवास पर छापेमारी

जांच के दौरान एसीबी की टीम ने जयपुर स्थित विभिन्न ठिकानों पर छापेमारी की। बीटू बाईपास क्षेत्र स्थित आवास से जुगल किशोर बिश्नोई को हिरासत में लिया गया, जबकि गोपालपुरा क्षेत्र के एक होटल से किरण कापड़िया और कथित दलाल सुनील सेतिया को पकड़ा गया। इसके बाद अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया।

कई शहरों में चल रही जांच

एसीबी के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार मामले की गंभीरता को देखते हुए जयपुर, बीकानेर और जोधपुर सहित विभिन्न स्थानों पर अलग-अलग टीमें गठित की गई थीं। कुल आठ जांच दल इस पूरे नेटवर्क पर नजर रख रहे थे। कार्रवाई के बाद भी कई ठिकानों पर तलाशी जारी है और आगे और भी खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

किसानों के लिए चिंताजनक मामला

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बाजार में नकली या निम्न गुणवत्ता वाले बीजों की बिक्री होती है तो इसका सीधा असर किसानों की फसल, उत्पादन और आय पर पड़ता है। ऐसे मामलों में प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत के आरोप कृषि व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न खड़े करते हैं।

निष्पक्ष जांच की मांग

किसान संगठनों और कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष एवं गहन जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि नकली बीजों के कारोबार और रिश्वतखोरी का यह नेटवर्क व्यापक स्तर पर काम कर रहा था तो इसकी जड़ तक पहुंचना आवश्यक है, ताकि किसानों के हितों की रक्षा की जा सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।

फिलहाल एसीबी की जांच जारी है और मामले में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने की संभावना है। कृषि जगत की नजर अब इस बात पर है कि जांच के बाद दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है और किसानों को नकली बीजों के खतरे से बचाने के लिए कौन से ठोस कदम उठाए जाते हैं।

श्री कृष्णा दुबे की प्रतिक्रिया

कृषि आदान विक्रेता संघ मध्य प्रदेश के प्रदेश उपाध्यक्ष श्री कृष्णा दुबे ने राजस्थान बीज निगम के निदेशक सहित अन्य लोगों की गिरफ्तारी और करोड़ों रुपये की बरामदगी के मामले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह प्रकरण कृषि क्षेत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अनियमितताओं का गंभीर उदाहरण है।

श्री दुबे ने कहा कि यह मामला राजस्थान का है और वहां के कृषि मंत्री आदरणीय श्री किरोड़ी लाल मीणा जी अपनी सक्रिय कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं। इसके बावजूद यदि बीज निगम जैसे महत्वपूर्ण संस्थान में इस प्रकार के आरोप सामने आए हैं, तो यह अत्यंत चिंताजनक है। अब पूरे कृषि जगत की नजर इस बात पर है कि प्रदेश सरकार और कृषि मंत्री इस मामले में क्या ठोस एवं प्रभावी कार्रवाई करते हैं।

उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न राज्यों में संचालित कई सरकारी बीज निगमों और कृषि संस्थाओं में समय-समय पर अनियमितताओं, लापरवाही और वित्तीय गड़बड़ियों की खबरें सामने आती रही हैं। ऐसे मामलों से किसानों का भरोसा कमजोर होता है और कृषि व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं।

श्री दुबे ने कहा कि दूसरी ओर कृषि आदान व्यापारियों पर लगातार नए-नए नियम और कानूनी प्रावधान लागू किए जाते हैं तथा छोटी-छोटी त्रुटियों पर भी कड़ी कार्रवाई की जाती है। लेकिन जहां वास्तव में सख्त निगरानी और जवाबदेही की आवश्यकता है, वहां अक्सर अपेक्षित कठोरता दिखाई नहीं देती।

उन्होंने कहा कि यदि इसी प्रकार का मामला किसी निजी कंपनी या कृषि आदान व्यापारी से जुड़ा होता, तो संबंधित व्यापारी के विरुद्ध तत्काल और कठोर कार्रवाई की जाती। इसलिए कानून और नियमों का पालन सभी के लिए समान रूप से सुनिश्चित किया जाना चाहिए, चाहे मामला निजी क्षेत्र का हो या किसी सरकारी संस्था का।

श्री दुबे ने मांग की कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि किसानों के हित सुरक्षित रह सकें और कृषि क्षेत्र में जवाबदेही एवं पारदर्शिता मजबूत हो सके।

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— श्री कृष्णा दुबे
प्रदेश उपाध्यक्ष, कृषि आदान विक्रेता संघ, मध्य प्रदेश, भोपाल

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