हलधर किसान नई दिल्ली। किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के तहत लागू संशोधित ब्याज सब्सिडी योजना किसानों के लिए न केवल सस्ता और आसान कृषि ऋण उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है, बल्कि इससे कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को भी मजबूती मिल रही है। योजना के तृतीय-पक्ष मूल्यांकन में सामने आया है कि इस योजना के तहत निवेश किए गए प्रत्येक एक रुपये से कृषि और संबद्ध क्षेत्र में 2.30 रुपये का शुद्ध मूल्यवर्धन होता है। यह जानकारी योजना के सामाजिक और आर्थिक प्रभाव को दर्शाती है।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अनुसार, किसान क्रेडिट कार्ड–संशोधित ब्याज सब्सिडी योजना का तृतीय-पक्ष मूल्यांकन बेंगलुरु स्थित सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन संस्थान (आईएसईसी) के माध्यम से कराया गया। इस मूल्यांकन का उद्देश्य देश के विभिन्न कृषि क्षेत्रों में योजना के प्रभाव और कार्यप्रणाली का आकलन करना था। मूल्यांकन रिपोर्ट में योजना से किसानों की आय, कृषि गतिविधियों, फसल सघनता, बहु-मौसमी खेती और संबद्ध क्षेत्रों में हुए बदलावों का विश्लेषण किया गया है।
हर एक रुपये के निवेश से 2.30 रुपये का मूल्यवर्धन
आईएसईसी की रिपोर्ट के अनुसार, किसान क्रेडिट कार्ड–संशोधित ब्याज सब्सिडी योजना के तहत सरकार द्वारा किए गए निवेश का कृषि अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। रिपोर्ट में पाया गया कि योजना के तहत निवेश किए गए प्रत्येक एक रुपये से कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में 2.30 रुपये का शुद्ध मूल्यवर्धन होता है। इससे स्पष्ट है कि किसानों को रियायती दर पर उपलब्ध कराया जाने वाला संस्थागत ऋण केवल तत्काल कृषि जरूरतों को पूरा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यापक रूप से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने में भी सहायक है।
किसानों पर ब्याज का बोझ हुआ कम
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि संशोधित ब्याज सब्सिडी योजना ने किसानों के ब्याज बोझ को कम करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। योजना की शुरुआत से लेकर वर्ष 2024-25 तक अनुमानित 1.87 लाख करोड़ रुपये की सब्सिडी प्रदान की गई है। इसके माध्यम से किसानों को कृषि कार्यों के लिए समय पर और अपेक्षाकृत कम लागत पर संस्थागत ऋण उपलब्ध कराने में मदद मिली है।
कृषि क्षेत्र में समय पर पूंजी उपलब्ध होना किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई, मजदूरी और अन्य कृषि आदानों की खरीद के लिए पर्याप्त कार्यशील पूंजी मिलने से किसान सही समय पर कृषि कार्य कर पा रहे हैं। इससे खेती की उत्पादकता और आय दोनों को बढ़ावा मिलने की संभावना मजबूत हुई है।
फसल सघनता और बहु-मौसमी खेती को मिला बढ़ावा
तृतीय-पक्ष मूल्यांकन में योजना का एक महत्वपूर्ण प्रभाव फसल सघनता और बहु-मौसमी खेती पर भी देखने को मिला है। रिपोर्ट के अनुसार, किसान क्रेडिट कार्ड योजना से जुड़े किसान बड़े क्षेत्रों में खेती कर रहे हैं और अधिक फसल सघनता हासिल कर रहे हैं।
विश्वसनीय सिंचाई सुविधाओं और रियायती कृषि ऋण की उपलब्धता ने किसानों को अलग-अलग मौसमों में विविध फसलों की खेती करने में मदद की है। इससे किसानों के फसल पोर्टफोलियो में विविधता आई है और केवल एक ही फसल या एक ही मौसम पर निर्भरता कम करने में सहायता मिली है।
योजना के माध्यम से पर्याप्त कार्यशील पूंजी उपलब्ध होने से किसानों को कृषि आदानों का समय पर उपयोग करने में भी मदद मिली है। वहीं, शीघ्र पुनर्भुगतान प्रोत्साहन यानी पीआरआई प्राप्त करने वाले लाभार्थियों में बेहतर ऋण अनुशासन देखा गया है। इससे बैंकों का किसानों को ऋण देने के प्रति विश्वास भी बढ़ा है।
पशुपालन और मत्स्य पालन से बढ़ा आय विविधीकरण
किसान क्रेडिट कार्ड योजना का प्रभाव केवल फसल उत्पादन तक सीमित नहीं रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, योजना ने दुग्ध उत्पादन और पशुपालन के विस्तार को भी बढ़ावा दिया है। किसानों ने फसल उत्पादन के साथ पशुधन और मत्स्य पालन जैसी संबद्ध गतिविधियों को जोड़कर अपनी आय के स्रोतों में विविधता लाने का प्रयास किया है।
इससे मौसमी कृषि पर निर्भरता कम करने में मदद मिली है। फसल आय में वृद्धि के साथ पशुपालन और मत्स्य पालन से अतिरिक्त आय के अवसर उपलब्ध होने से किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिली है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि योजना ने अंतर्देशीय मत्स्य पालन के लिए कार्यशील पूंजी की जरूरतों को पूरा करने में सहायता की है। विशेष रूप से पूर्वोत्तर क्षेत्र में कृषि विविधीकरण के लिए यह महत्वपूर्ण माना गया है।
केसीसी कवरेज बढ़ाने पर सरकार का जोर
सरकार की ओर से किसानों को समय पर और किफायती संस्थागत ऋण उपलब्ध कराने तथा किसान क्रेडिट कार्ड का दायरा बढ़ाने के लिए लगातार कई कदम उठाए जा रहे हैं। इसके तहत जमीनी स्तर पर कृषि ऋण लक्ष्यों और बैंकों के लिए प्राथमिकता क्षेत्र ऋण लक्ष्यों का वार्षिक निर्धारण किया जाता है।
इसके अलावा, किसान क्रेडिट कार्ड के तहत बिना गारंटी ऋण की सीमा को 1.60 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये किया गया है। यह बदलाव 1 जनवरी 2025 से प्रभावी किया गया है। इससे छोटे और सीमांत किसानों सहित अधिक संख्या में किसानों को संस्थागत ऋण की सुविधा मिलने की उम्मीद है।
डिजिटल तकनीक से आसान हो रही ऋण प्रक्रिया
कृषि ऋण वितरण प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने कई तकनीकी पहल भी शुरू की हैं। इनमें किसान ऋण पोर्टल, जन समर्थ पोर्टल, ई-किसान क्रेडिट कार्ड और कृषिका जैसी पहल शामिल हैं। इन डिजिटल माध्यमों का उद्देश्य किसानों के लिए ऋण आवेदन और वितरण प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक बनाना तथा संस्थागत ऋण तक उनकी पहुंच को मजबूत करना है।
किसान क्रेडिट कार्ड योजना के लाभों के प्रति किसानों को जागरूक करने और योजना का दायरा बढ़ाने के लिए केंद्र एवं राज्य सरकारों के साथ भारतीय रिजर्व बैंक, नाबार्ड, राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति और विभिन्न बैंक भी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करते हैं। इसके अलावा सूचना, शिक्षा एवं संचार (आईईसी) गतिविधियों और किसान क्रेडिट कार्ड संतृप्ति अभियानों के माध्यम से पात्र किसानों को योजना से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री पंकज चौधरी ने यह जानकारी लोकसभा में दी। तृतीय-पक्ष मूल्यांकन के निष्कर्षों से संकेत मिलता है कि किसान क्रेडिट कार्ड–संशोधित ब्याज सब्सिडी योजना किसानों को सस्ता संस्थागत ऋण उपलब्ध कराने के साथ-साथ कृषि उत्पादन, आय विविधीकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
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