पीएमएवाई-जी के तहत 12 राज्यों को ₹10,021 करोड़ की मदर सैंक्शन जारी
हलधर किसान नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने ग्रामीण भारत में ‘हर गरीब को पक्का घर’ उपलब्ध कराने के अपने संकल्प को आगे बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) के अंतर्गत 12 राज्यों को ₹10,021.42 करोड़ की मदर सैंक्शन जारी की है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से यह राशि जारी करते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि देश का कोई भी गरीब परिवार कच्चे मकान में रहने को मजबूर न रहे।
इस अवसर पर केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. चंद्र शेखर पेम्मासानी भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के ग्रामीण विकास मंत्री केशव प्रसाद मौर्य, राजस्थान के मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा, असम के मंत्री अतुल बोरा, झारखंड की मंत्री दीपिका पांडे सहित विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी और ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव रोहित कंसल भी शामिल हुए।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जिन राज्यों को मदर सैंक्शन जारी की, उनमें असम, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, केरल, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश शामिल हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2016 में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की शुरुआत इस उद्देश्य से की गई थी कि ग्रामीण गरीबों को सम्मानजनक आवास मिल सके।
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि योजना के तहत अब तक 4.95 करोड़ घरों के लक्ष्य के मुकाबले 3.91 करोड़ घरों को स्वीकृति दी जा चुकी है, जबकि 3.05 करोड़ से अधिक घरों का निर्माण पूरा हो चुका है। उन्होंने कहा कि सरकार केवल मकान नहीं बना रही, बल्कि ऐसे घर तैयार कर रही है जहां सड़क, बिजली, पानी, गैस और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध हों। इससे ग्रामीण परिवारों का जीवन स्तर बेहतर हो रहा है और गांवों में विकास की नई तस्वीर दिखाई दे रही है।
उन्होंने कहा कि कई राज्यों ने योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए नवाचार भी किए हैं। कुछ राज्यों ने शिकायत निवारण प्रणाली, हेल्पलाइन, वर्षा जल संचयन, स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आजीविका संवर्धन तथा राजमिस्त्री प्रशिक्षण जैसे कदम उठाए हैं, जिससे योजना के लक्ष्य तेजी से पूरे हो रहे हैं। केंद्रीय मंत्री ने इन प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि राज्यों के सहयोग से ही योजना को गति मिल रही है।
महिला सशक्तिकरण को योजना की बड़ी उपलब्धि बताते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पीएमएवाई-जी के अंतर्गत लगभग 75 प्रतिशत घर महिलाओं के नाम अथवा संयुक्त स्वामित्व में स्वीकृत किए गए हैं। इससे महिलाओं को सामाजिक सुरक्षा और आत्मसम्मान मिला है। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की आर्थिक और सामाजिक स्थिति मजबूत करने में यह योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
केंद्रीय मंत्री ने भूमिहीन गरीब परिवारों की समस्या का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कई गरीब परिवारों के पास भूमि उपलब्ध नहीं होने के कारण आवास निर्माण प्रभावित होता है। ऐसे मामलों में राज्य सरकारों को भूमि उपलब्ध कराने की दिशा में विशेष पहल करनी चाहिए ताकि कोई भी पात्र परिवार योजना के लाभ से वंचित न रहे।
उन्होंने राज्यों से लंबित शिकायतों का समयबद्ध समाधान करने, निर्माणाधीन घरों को शीघ्र पूरा कराने और जारी राशि का त्वरित उपयोग सुनिश्चित करने का आग्रह किया। साथ ही उन्होंने कहा कि कुछ राज्यों ने अभी तक वर्ष 2024-25 और 2025-26 के लक्ष्य के अनुरूप स्वीकृतियां पूरी नहीं की हैं, जिन्हें 30 जून 2026 तक हर हाल में पूरा किया जाना चाहिए।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर ‘एक पेड़, मां के नाम’ अभियान में भागीदारी का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पीएमएवाई-जी लाभार्थी और हर इकाई कम से कम एक पौधा लगाए, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में हरियाली को भी बढ़ावा मिलेगा।
ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव रोहित कंसल ने कहा कि राज्यों के सहयोग से पीएमएवाई-जी का प्रभावी क्रियान्वयन संभव हो पाया है। उन्होंने जानकारी दी कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए पहले ही ₹11,121 करोड़ की मदर सैंक्शन जारी की जा चुकी है और अब ₹10,021 करोड़ से अधिक की अतिरिक्त राशि जारी की गई है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष पिछले वर्ष की तुलना में तीन गुना अधिक आवास निर्माण का लक्ष्य रखा गया है, जिसे केंद्र और राज्यों के संयुक्त प्रयासों से समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा।
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण आज ग्रामीण भारत के विकास और गरीबों के जीवन में बदलाव का बड़ा माध्यम बन चुकी है। सरकार का उद्देश्य है कि हर पात्र ग्रामीण परिवार को पक्का आवास और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हों, ताकि गांवों में रहने वाले लोगों का जीवन सम्मानजनक और सुरक्षित बन सके।
यहॉ भी पढ़े – राष्ट्रीय प्राणी उद्यान के ग्रीष्मकालीन अवकाश कार्यक्रम से बच्चों में बढ़ेगी पर्यावरण संरक्षण की समझ
